हरे रामा
जग पति ब्रता चारि बिधि अहहिं
बेद पुरान संत सब कहहिं
उत्तम के अस बस मन माहीं
सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं
मध्यम परपति देखइ कैसें
भ्राता पिता पुत्र निज जैंसें
धर्म बिचारि समुझि कुल रहई
सो निकिष्ट त्रिय श्रुति अस कहई
बिनु अवसर भय तें रह जोई
जानेहु अधम नारि जग सोई
पति बंचक परपति रति करई
रौरव नरक कल्प सत परई
जय श्री राम
जग पति ब्रता चारि बिधि अहहिं
बेद पुरान संत सब कहहिं
उत्तम के अस बस मन माहीं
सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं
मध्यम परपति देखइ कैसें
भ्राता पिता पुत्र निज जैंसें
धर्म बिचारि समुझि कुल रहई
सो निकिष्ट त्रिय श्रुति अस कहई
बिनु अवसर भय तें रह जोई
जानेहु अधम नारि जग सोई
पति बंचक परपति रति करई
रौरव नरक कल्प सत परई
जय श्री राम
