हरे कृष्णा
ऊधो मोहि ब्रज बिसरत नाही -मोहि ब्रज बिसरत नाही
हंस सुता की सुंदर कगरी अरु कुंजन की छाही
वे सुरभि वे बच्छ दोहिनी खरिक दुहावन जाही
ग्वाल बाल सब करत कुलाहल नाचत गहि गहि बाही
जबही सुरति आवति वा सुख की जिय उमगत तन नाही
अनगन भाती करो बहु लीला जसुदा नन्द निबाही
ऊधो मोहि ब्रज बिसरत नाही - मोहि ब्रज बिसरत नाही
ब्रज बिसरत नाही
ब्रज बिसरत नाही
जय श्री कृष्णा
ऊधो मोहि ब्रज बिसरत नाही -मोहि ब्रज बिसरत नाही
हंस सुता की सुंदर कगरी अरु कुंजन की छाही
वे सुरभि वे बच्छ दोहिनी खरिक दुहावन जाही
ग्वाल बाल सब करत कुलाहल नाचत गहि गहि बाही
जबही सुरति आवति वा सुख की जिय उमगत तन नाही
अनगन भाती करो बहु लीला जसुदा नन्द निबाही
ऊधो मोहि ब्रज बिसरत नाही - मोहि ब्रज बिसरत नाही
ब्रज बिसरत नाही
ब्रज बिसरत नाही
जय श्री कृष्णा
