हरे रामा
मैं दुर्बचन कहे बहुतेरे
कह मुनि पाप मिटिहिं किमि मेरे
जपहु जाइ संकर सत नामा
होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा
कोउ नहिं सिव समान प्रिय मोरें
असि परतीति तजहु जनि भोरें
जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी
सो न पाव मुनि भगति हमारी
जय श्री राम
मैं दुर्बचन कहे बहुतेरे
कह मुनि पाप मिटिहिं किमि मेरे
जपहु जाइ संकर सत नामा
होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा
कोउ नहिं सिव समान प्रिय मोरें
असि परतीति तजहु जनि भोरें
जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी
सो न पाव मुनि भगति हमारी
जय श्री राम
