हरे राम
अति दुर्लभ कैवल्य परम पद
संत पुरान निगम आगम बद
राम भजत सोइ मुकुति गोसाई
अनइच्छित आवइ बरिआ
जिमि थल बिनु जल रहि न सकाई
कोटि भाँति कोउ करै उपाई
तथा मोच्छ सुख सुनु खगराई
रहि न सकइ हरि भगति बिहाई
अस बिचारि हरि भगत सयाने
मुक्ति निरादर भगति लुभाने
भगति करत बिनु जतन प्रयासा
संसृति मूल अबिद्या नासा
सेवक सेब्य भाव बिनु
भव न तरिअ उरगारि
भजहु राम पद पंकज
अस सिद्धांत बिचारि
जो चेतन कहँ ज़ड़ करइ
ज़ड़हि करइ चैतन्य
अस समर्थ रघुनायकहिं
भजहिं जीव ते धन्य
जय श्री राम
अति दुर्लभ कैवल्य परम पद
संत पुरान निगम आगम बद
राम भजत सोइ मुकुति गोसाई
अनइच्छित आवइ बरिआ
जिमि थल बिनु जल रहि न सकाई
कोटि भाँति कोउ करै उपाई
तथा मोच्छ सुख सुनु खगराई
रहि न सकइ हरि भगति बिहाई
अस बिचारि हरि भगत सयाने
मुक्ति निरादर भगति लुभाने
भगति करत बिनु जतन प्रयासा
संसृति मूल अबिद्या नासा
सेवक सेब्य भाव बिनु
भव न तरिअ उरगारि
भजहु राम पद पंकज
अस सिद्धांत बिचारि
जो चेतन कहँ ज़ड़ करइ
ज़ड़हि करइ चैतन्य
अस समर्थ रघुनायकहिं
भजहिं जीव ते धन्य
जय श्री राम
