हरे रामा
बड़ें भाग मानुष तनु पावा
सुर दुर्लभ सब ग्रंथिन्ह गावा
साधन धाम मोच्छ कर द्वारा
पाइ न जेहिं परलोक सँवारा
सो परत्र दुख पावइ
सिर धुनि धुनि पछिताइ
कालहि कर्महि ईस्वरहि
मिथ्या दोष लगाइ
आकर चारि लच्छ चौरासी
जोनि भ्रमत यह जिव अबिनासी
फिरत सदा माया कर प्रेरा
काल कर्म सुभाव गुन घेरा
कबहुँक करि करुना नर देही
देत ईस बिनु हेतु सनेही
करत कष्ट बहु पावइ कोऊ
भक्ति हीन मोहि प्रिय नहिं सोऊ
भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी
बिनु सतसंग न पावहिं प्रानी
जय श्री राम
बड़ें भाग मानुष तनु पावा
सुर दुर्लभ सब ग्रंथिन्ह गावा
साधन धाम मोच्छ कर द्वारा
पाइ न जेहिं परलोक सँवारा
सो परत्र दुख पावइ
सिर धुनि धुनि पछिताइ
कालहि कर्महि ईस्वरहि
मिथ्या दोष लगाइ
आकर चारि लच्छ चौरासी
जोनि भ्रमत यह जिव अबिनासी
फिरत सदा माया कर प्रेरा
काल कर्म सुभाव गुन घेरा
कबहुँक करि करुना नर देही
देत ईस बिनु हेतु सनेही
करत कष्ट बहु पावइ कोऊ
भक्ति हीन मोहि प्रिय नहिं सोऊ
भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी
बिनु सतसंग न पावहिं प्रानी
जय श्री राम
