हरे रामा
ग्रह भेषज जल पवन पट
पाइ कुजोग सुजोग
होहि कुबस्तु सुबस्तु जग
लखहिं सुलच्छन लोग
सम प्रकास तम पाख दुहुँ
नाम भेद बिधि कीन्ह
ससि सोषक पोषक समुझि
जग जस अपजस दीन्ह
जड़ चेतन जग जीव जत
सकल राममय जानि
बंदउँ सब के पद कमल
सदा जोरि जुग पानि
जय श्री राम
ग्रह भेषज जल पवन पट
पाइ कुजोग सुजोग
होहि कुबस्तु सुबस्तु जग
लखहिं सुलच्छन लोग
सम प्रकास तम पाख दुहुँ
नाम भेद बिधि कीन्ह
ससि सोषक पोषक समुझि
जग जस अपजस दीन्ह
जड़ चेतन जग जीव जत
सकल राममय जानि
बंदउँ सब के पद कमल
सदा जोरि जुग पानि
जय श्री राम
