हरे रामा
धर्म हेतु अवतरेहु गोसाई
मारेहु मोहि ब्याध की नाई
मैं बैरी सुग्रीव पिआरा
अवगुन कबन नाथ मोहि मारा
अनुज बधू भगिनी सुत नारी
सुनु सठ कन्या सम ए चारी
इन्हहि कुद्दष्टि बिलोकइ जोई
ताहि बधें कछु पाप न होई
मम भुज बल आश्रित तेहि जानी
मारा चहसि अधम अभिमानी
सुनहु राम स्वामी सन
चल न चातुरी मोरि
प्रभु अजहूँ मैं पापी
अंतकाल गति तोरि
सुनत राम अति कोमल बानी
बालि सीस परसेउ निज पानी
अचल करौं तनु राखहु प्राना
जय श्री राम
धर्म हेतु अवतरेहु गोसाई
मारेहु मोहि ब्याध की नाई
मैं बैरी सुग्रीव पिआरा
अवगुन कबन नाथ मोहि मारा
अनुज बधू भगिनी सुत नारी
सुनु सठ कन्या सम ए चारी
इन्हहि कुद्दष्टि बिलोकइ जोई
ताहि बधें कछु पाप न होई
मम भुज बल आश्रित तेहि जानी
मारा चहसि अधम अभिमानी
सुनहु राम स्वामी सन
चल न चातुरी मोरि
प्रभु अजहूँ मैं पापी
अंतकाल गति तोरि
सुनत राम अति कोमल बानी
बालि सीस परसेउ निज पानी
अचल करौं तनु राखहु प्राना
जय श्री राम
